भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नागरिकता संशोधन क़ानून पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जनरल बिपिन रावत ने कहा, ''नेता वो होते हैं जो सही दिशा में लोगों का नेतृत्व करते हैं.'' जनरल रावत ने कहा कि बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी और कॉलेज के स्टूडेंट जिस तरहमुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं उससे शहरों में हिंसा और आगज़नी बढ़ रही है.
जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं. उन्होंने दिल्ली में गुरुवार को एकमुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह कार्यक्रम में बोलते हुए नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शन की आलोचना की है.
जनरल रावत ने कहा, ''नेता को नेतृत्व से ही जाना जाता है. अगर आप प्रगति के रास्ते पर ले जाते हैं तो आपके पीछे हर कोई हो जाता है. नेता वही है जो लोगों को सही दिशा में ले जाता है. नेता वो नहीं होता जो अनुचित दिशा में ले जाए. हम देख रहे हैं कि कॉलेज और यूनिमुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहर्सिटी में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें हिंसा और आगज़नी हो रही है. यह कोई नेतृत्व नहीं है.''
बीते कुछ दिनों से नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इन प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी अलग-अलग मौक़ों पर निशाना साथ चुके हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बिपिन रावत ने कहा, ''दिल्ली में जब हम सर्दियों से बचने के लिए कपड़े पहनते हैं तब मैं सियाचिन या ऐसी जगहों पर तैनात जवानों को सलाम करता हूं, जो माइनस 10 और माइनस 45 डिग्री तापमान पर तैनात हैं.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बिपिन रावत की रिटायरमेंट के बाद लेफ़्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे देश के अगले सेना प्रमुख होंगे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ बनाने का ऐलान किया था. बीते दिनों मोदी कैबिनेट की बैठक में सीडीएस बनाए जाने को मंज़ूरी भी मिल गई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा अनुमान लगाया गया था कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत हो सकते हैं. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नागरिकता संशोधन क़ानून पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जनरल बिपिन रावत ने कहा, ''नेता वो होते हैं जो सही दिशा में लोगों का नेतृत्व करते हैं.'' जनरल रावत ने कहा कि बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी और कॉलेज के स्टूडेंट जिस तरह से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं उससे शहरों में हिंसा और आगज़नी बढ़ रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं. उन्होंने दिल्ली में गुरुवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शन की आलोचना की है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जनरल रावत ने कहा, ''नेता को नेतृत्व से ही जाना जाता है. अगर आप प्रगति के रास्ते पर ले जाते हैं तो आपके पीछे हर कोई हो जाता है. नेता वही है जो लोगों को सही दिशा में ले जाता है. नेता वो नहीं होता जो अनुचित दिशा में ले जाए. हम देख रहे हैं कि कॉलेज और यूनिर्सिटी मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहमें जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें हिंसा और आगज़नी हो रही है. यह कोई नेतृत्व नहीं है.''
बीते कुछ दिनों से नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इन प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी अलग-अलग मौक़ों पर निशाना साथ चुके हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बिपिन रावत ने कहा, ''दिल्ली में जब हम सर्दियों से बचने के लिए कपड़े पहनते हैं तब मैं सियाचिन या ऐसी जगहों पर तैनात जवानों को सलाम करता हूं, जो माइनस 10 और माइनस 45 डिग्री तापमान पर तैनात हैं.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बिपिन रावत की रिटायरमेंट के बाद लेफ़्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे देश के अगले सेना प्रमुख होंगे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ बनाने का ऐलान किया था. बीते दिनों मोदी कैबिनेट की बैठक में सीडीएस बनाए जाने को मंज़ूरी भी मिल गई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा अनुमान लगाया गया था कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत हो सकते हैं. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नागरिकता संशोधन क़ानून पर होमुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की है.
जनरल बिपिन रावत ने कहा, ''नेता वो होते हैं जो सही दिशा में लोगों का नेतृत्व करते हैं.'' जनरल रावत ने कहा कि बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी और कॉलेज के स्टूडेंट जिस तरह से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं उससे शहरों में हिंसा और आगज़नी बढ़ रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं. उन्होंने दिल्ली में गुरुवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शन की आलोचना की है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जनरल रावत ने कहा, ''नेता को नेतृत्व से ही जाना जाता है. अगर आप प्रगति के रास्ते पर ले जाते हैं तो आपके पीछे हर कोई हो जाता है. नेता वही है जो लोगों को सही दिशा में ले जाता है. नेता वो नहीं होता जो अनुचित दिशा में ले जाए. हम देख रहे हैं कि कॉलेज और यूनिर्सिटी में जो विरोमुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहध प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें हिंसा और आगज़नी हो रही है. यह कोई नेतृत्व नहीं है.''
बीते कुछ दिनों से नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इन प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी अलग-अलग मौक़ों पर निशाना साथ चुके हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बिपिन रावत ने कहा, ''दिल्ली में जब हम सर्दियों से बचने के लिए कपड़े पहनते हैं तब मैं सियाचिन या ऐसी जगहों पर तैनात जवानों को सलाम करता हूं, जो माइनस 10 और माइनस 45 डिग्री तापमान पर तैनात हैं.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बिपिन रावत की रिटायरमेंट के बाद लेफ़्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे देश के अगले सेना प्रमुख होंगे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला से चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ बनाने का ऐलान किया था. बीते दिनों मोदी कैबिनेट की बैठक में सीडीएस बनाए जाने को मंज़ूरी भी मिल गई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा अनुमान लगाया गया था कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत हो सकते हैं. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
Thursday, December 26, 2019
Tuesday, December 17, 2019
जामियाः क्या दिल्ली पुलिस ने लगाई डीटीसी बस में आग?-फ़ैक्ट चेक
दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर रविवार को हुए हिंसक प्रदर्शन का एक वीडियो वायरल हो रहा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस वीडियो में एक जलती हुई मोटर बाइक नज़र आ रही है जिसे एक शख्स फायर एक्स्टिंगग्विशर से बुझाने की कोशिश कर रहा है. पास में एक डीटीसी क्लस्टर बस खड़ी है. पुलिस के कुछ लोग प्लास्टिक के पीले डब्बों में कुछ भरकर गाड़ी में ले जा रहे हैं. 20 सेकेंड के इस वीडियो में पीछे से आवाज़ आ रही है "बुझ गया...बुझ गया."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस वीडियो को ट्वीट करते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने दिल्ली पुलिस पर बसों में आग लगाने का आरोप लगाया. उन्होने लिखा, "चुनाव में हार के डर से बीजेपी दिल्ली में आग लगवा रही है. आप किसी भी तरह की हिंसा के ख़िलाफ़ है. ये बीजेपी की घटिया राजनीति है. इस वीडियो में ख़ुद देखें कि किस तरह पुलिस के संरक्षण में आग लगाई जा रही है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया, "इस बात की तुरंत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि बसों में आग लगने से पहले ये वर्दी वाले लोग बसों में पीले और सफ़ेद रंग वाली केन से क्या डाल रहे हैं? और ये किसके इशारे पर किया गया? फ़ोटो में साफ़ दिख रहा है कि बीजेपी ने घटिया राजनीति करते हुए पुलिस से ये आग लगवाई है."
इसके बाद सोशल मीडिया पर इस वीडियो के लेकर बहस छिड़ गई कि ये आग पुलिस ने लगाई या प्रदर्शनकारियों ने.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
फ़ैक्ट चेक टीम ने इस वीडियो की हक़ीकत जानने के लिए पड़ताल शुरू की. बीबीसी को दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने बताया कि ''वीडियो के साथ ग़लत जानकारियां फैलाई जा रही हैं. पुलिस आग बुझाने का काम कर रही थी."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वीडियों की परत-दर-परत जानकारी जुटाने के लिए बीबीसी ने एनडीटीवी के पत्रकार अरविंद गुनशेखर से संपर्क किया. उनका कहना है कि वे घटनास्थल पर मौजूद थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी को अरविंद ने बताया कि ''मैंने इस वीडियो को अपने फ़ोन पर शूट किया था. क्योंकि तब तक मेरे ऑफिस की वैन घटना स्थल पर नहीं पहुंच सकी थी. ये शाम 5.01 बजे की घटना का वीडियो है. मैंने शाम 5.06 बजे एक दूसरा वीडियो भी बनाया. दोनों वीडियो में साफ़ देख सकते हैं कि बस में आग नहीं ही है. पुलिस वहां मोटर साइकिल में लगी आग को बुझाने का काम कर रही थी.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अरविंद ने 20 सेकेंड और 59 सेकेंड के दो वीडियो बीबीसी को भेजे. हमने पाया कि इस बस में आग नहीं लगी है. बल्कि उसके शीशे टूटे हुए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी की टीम न्यू फ़्रेंड्स कॉलोनी- मथुरा रोड पहुंची और इस घटना के कुछ चश्मदीदों से बात की. घटनास्थल के पास एक घर के सिक्योरिटी गार्ड राहुल कुमार ने हमें बताया कि "ये घटना रविवार को लगभग दो से तीन बजे की है. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का हुजूम आया और तभी आग लगा दी गई. हमने नहीं देखा कि पुलिस ने आग लगाई हो."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हालांकि उन्होंने कैमरे पर हमसे बात करने से इनकार कर दिया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद बीबीसी की टीम दिल्ली के न्यू फ़्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन पहुंची. यहां भारी संख्या में पुलिस बल हेलमेट पहने और हाथों में लाठियां लिए खड़ी थी. हमारी मुलाक़ात एडिशनल थाना इंचार्ज मनोज वर्मा से हुई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जब हमने उन्हें ये वीडियो दिखाया गया तो उन्होंने बताया. "ये वीडियो हमारे इलाक़े का ही है. आप देखिए कि वीडियो में जो बस खड़ी है उसमें आग नहीं लगी है. इसे तोड़ा गया है. हमारी बाइकों को आग लगा दिया गया. हम उसे बुझाने का काम कर रहे थे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
घटनास्थल पर अब ये बस मौजूद नहीं है. इसे डीटीसी डिपो भेजा जा चुका है. पुलिस के दावे के मुताबिक़ ये बात सही है कि बस में आग नहीं लगी और पास में एक बाइक जल भी रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद हमने पूछा कि क्या इस मामले में पुलिस ने कोई एफ़आईआर दर्ज की है, इस पर उन्होंने पहले तो कहा कि अभी नहीं. लेकिन जब उनसे दोबारा ये सवाल किया गया तो उन्होंने बताया, "एफ़आईआर दर्ज हुई है उसमें कुछ नाम भी शामिल हैं लेकिन हम आपको दिखा नहीं सकते क्योंकि ये मामला काफ़ी गंभीर है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस इलाक़े में हमें चार जली हुई डीटीसी की बसें, कुछ बाइकें और एक पूरी तरह से टूटी हुई बस और कार नज़र आई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, "अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं कि पुलिस के लोगों ने बस को आग लगाया. वीडियो में DL1PD-0299 नंबर की बस नज़र आ रही है जिसे आग भी नहीं लगी. एक चिंगारी थी जिसे हम बुझाने में लगे थे. आपसे निवेदन है कि किसी तरह की अफ़वाहों पर यकीन न करें."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी ने इस मामले पर मनीष सिसौदिया का रुख जानने के लिए उन्हें संपर्क किया लेकिन उनकी ओर से हमारी फ़ोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुल मिलाकर बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया कि जिस बस का वीडियो शेयर करके पुलिस पर सार्वजनिक संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है, वो ग़लत है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस वीडियो में एक जलती हुई मोटर बाइक नज़र आ रही है जिसे एक शख्स फायर एक्स्टिंगग्विशर से बुझाने की कोशिश कर रहा है. पास में एक डीटीसी क्लस्टर बस खड़ी है. पुलिस के कुछ लोग प्लास्टिक के पीले डब्बों में कुछ भरकर गाड़ी में ले जा रहे हैं. 20 सेकेंड के इस वीडियो में पीछे से आवाज़ आ रही है "बुझ गया...बुझ गया."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस वीडियो को ट्वीट करते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने दिल्ली पुलिस पर बसों में आग लगाने का आरोप लगाया. उन्होने लिखा, "चुनाव में हार के डर से बीजेपी दिल्ली में आग लगवा रही है. आप किसी भी तरह की हिंसा के ख़िलाफ़ है. ये बीजेपी की घटिया राजनीति है. इस वीडियो में ख़ुद देखें कि किस तरह पुलिस के संरक्षण में आग लगाई जा रही है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया, "इस बात की तुरंत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि बसों में आग लगने से पहले ये वर्दी वाले लोग बसों में पीले और सफ़ेद रंग वाली केन से क्या डाल रहे हैं? और ये किसके इशारे पर किया गया? फ़ोटो में साफ़ दिख रहा है कि बीजेपी ने घटिया राजनीति करते हुए पुलिस से ये आग लगवाई है."
इसके बाद सोशल मीडिया पर इस वीडियो के लेकर बहस छिड़ गई कि ये आग पुलिस ने लगाई या प्रदर्शनकारियों ने.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
फ़ैक्ट चेक टीम ने इस वीडियो की हक़ीकत जानने के लिए पड़ताल शुरू की. बीबीसी को दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने बताया कि ''वीडियो के साथ ग़लत जानकारियां फैलाई जा रही हैं. पुलिस आग बुझाने का काम कर रही थी."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वीडियों की परत-दर-परत जानकारी जुटाने के लिए बीबीसी ने एनडीटीवी के पत्रकार अरविंद गुनशेखर से संपर्क किया. उनका कहना है कि वे घटनास्थल पर मौजूद थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी को अरविंद ने बताया कि ''मैंने इस वीडियो को अपने फ़ोन पर शूट किया था. क्योंकि तब तक मेरे ऑफिस की वैन घटना स्थल पर नहीं पहुंच सकी थी. ये शाम 5.01 बजे की घटना का वीडियो है. मैंने शाम 5.06 बजे एक दूसरा वीडियो भी बनाया. दोनों वीडियो में साफ़ देख सकते हैं कि बस में आग नहीं ही है. पुलिस वहां मोटर साइकिल में लगी आग को बुझाने का काम कर रही थी.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अरविंद ने 20 सेकेंड और 59 सेकेंड के दो वीडियो बीबीसी को भेजे. हमने पाया कि इस बस में आग नहीं लगी है. बल्कि उसके शीशे टूटे हुए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी की टीम न्यू फ़्रेंड्स कॉलोनी- मथुरा रोड पहुंची और इस घटना के कुछ चश्मदीदों से बात की. घटनास्थल के पास एक घर के सिक्योरिटी गार्ड राहुल कुमार ने हमें बताया कि "ये घटना रविवार को लगभग दो से तीन बजे की है. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का हुजूम आया और तभी आग लगा दी गई. हमने नहीं देखा कि पुलिस ने आग लगाई हो."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हालांकि उन्होंने कैमरे पर हमसे बात करने से इनकार कर दिया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद बीबीसी की टीम दिल्ली के न्यू फ़्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन पहुंची. यहां भारी संख्या में पुलिस बल हेलमेट पहने और हाथों में लाठियां लिए खड़ी थी. हमारी मुलाक़ात एडिशनल थाना इंचार्ज मनोज वर्मा से हुई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जब हमने उन्हें ये वीडियो दिखाया गया तो उन्होंने बताया. "ये वीडियो हमारे इलाक़े का ही है. आप देखिए कि वीडियो में जो बस खड़ी है उसमें आग नहीं लगी है. इसे तोड़ा गया है. हमारी बाइकों को आग लगा दिया गया. हम उसे बुझाने का काम कर रहे थे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
घटनास्थल पर अब ये बस मौजूद नहीं है. इसे डीटीसी डिपो भेजा जा चुका है. पुलिस के दावे के मुताबिक़ ये बात सही है कि बस में आग नहीं लगी और पास में एक बाइक जल भी रही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद हमने पूछा कि क्या इस मामले में पुलिस ने कोई एफ़आईआर दर्ज की है, इस पर उन्होंने पहले तो कहा कि अभी नहीं. लेकिन जब उनसे दोबारा ये सवाल किया गया तो उन्होंने बताया, "एफ़आईआर दर्ज हुई है उसमें कुछ नाम भी शामिल हैं लेकिन हम आपको दिखा नहीं सकते क्योंकि ये मामला काफ़ी गंभीर है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इस इलाक़े में हमें चार जली हुई डीटीसी की बसें, कुछ बाइकें और एक पूरी तरह से टूटी हुई बस और कार नज़र आई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, "अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं कि पुलिस के लोगों ने बस को आग लगाया. वीडियो में DL1PD-0299 नंबर की बस नज़र आ रही है जिसे आग भी नहीं लगी. एक चिंगारी थी जिसे हम बुझाने में लगे थे. आपसे निवेदन है कि किसी तरह की अफ़वाहों पर यकीन न करें."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी ने इस मामले पर मनीष सिसौदिया का रुख जानने के लिए उन्हें संपर्क किया लेकिन उनकी ओर से हमारी फ़ोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुल मिलाकर बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया कि जिस बस का वीडियो शेयर करके पुलिस पर सार्वजनिक संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है, वो ग़लत है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
Monday, December 9, 2019
印度体制下恶性轮奸案发后的“惊世结局”
在印度第六大城市海得拉巴,今年11月27日傍晚6点,一名职业是兽医的27岁女子出门,骑着她的摩托车,按约看医生。她不知道她在人世间的命运已经快要结束。
后来她给家人打电话说,她有一个轮胎爆胎,而有一个卡车司机主动提出帮忙。她说她在一个公路收费站附近等着。
此后,她的家人就没能再联系上她,随后报警,称其失踪。第二天早上,一个送牛奶工在天桥下发现她已经被烧焦的遗体。
警方调查后称,这位27岁受害者在被杀前遭到轮奸。
印度强奸问题频发,近年来社会民情对这一事件愤怒不已。事件曝光后,其家人指责警方行动缓慢。特别是有警察甚至暗示受害者当时是否私奔了。
之后,警方将3名接到失踪报告的警察解职,并逮捕了四名嫌疑人。
此案让民众就强奸频发问题的愤怒情绪爆发,几天内,大规模抗议导致群体事件,警方受到巨大的批评和压力。很多民众要求,不能让这些罪犯借助司法逃避罪责,应该严惩甚至对其立即处以极刑。
四名嫌疑人被警方拘留后,于当地时间周五(12月6日)凌晨被带回犯罪现场重现指认案发情况。这是海得拉巴市郊区的一个名为赛博阿巴德(意为网络之地)的新兴区域,这里有着许多全球大科技公司驻地,比如微软和谷歌。
印度警方告诉BBC泰卢固语部说,嫌犯试图偷取警察的枪逃跑,被警察击毙。在这个过程中,两名警察也受伤了。
击毙嫌疑人的消息传出后,受害者的母亲告诉BBC说,虽然女儿再不能失而复得,但原来以为无法得到的正义已经得到伸张。希望其他女孩不会再有自己女儿的悲惨遭遇。
这位母亲还说,她希望印度能加强关于性侵犯和强奸的法律。
受害人的妹妹说,警方的行动非常出乎意料。她原来也期待法庭审判和法庭伸张正义,虽然这不能让她姐姐死而复生,但这是一个很大的安慰。
她说,由于警方的行动,潜在的罪犯将会三思而后行,可能不敢再做这样的事情。
民众庆祝
BBC泰卢固语部在当地的记者得到嫌疑人被击毙的消息后,去受害者家里采访,看到受害者的邻居们用鞭炮庆祝,数千人走上街头为警察欢呼,有人在街上发糖。
然而,一位执法专家批评了警方的行动,但同时补充说,现在说警方杀人是否构成法外处决还为时过早。
在印度的社交媒体上,警方行动的消息广为流传。许多人在推特和脸书上为警察点赞鼓掌,称赞他们替天行道,伸张正义。
2012 年,在首都德里,一名学生曾在公交车上遭到轮奸折磨后死亡,其母亲也对这起枪杀嫌疑犯事件表示赞许。
她告诉印度媒体表示,她对这种惩罚非常满意。警方做得非常好。
BBC泰卢固语部记者巴拉在枪杀现场报道说,大约有2千民众在那里聚集,造成巨大的交通堵塞。
车辆在高速公路上已经无法行使,现场人们高声喊着警察万岁。
在事件现场,人们还将玫瑰花瓣和糖果撒向在场的警察。
普拉卡什·辛格是一名退休警官,也是警察制度改革的主要设计师。他告诉BBC,枪决嫌疑人事件完全可以避免。
他表示,在押人员被带往法庭或犯罪现场时,应谨慎行事。在将其提取出监狱之前,应保护他们,戴上手铐,并妥善搜查。
如果警察不小心,什么样的事情都可能发生。
但辛格也表示,现在说这起事件是否属于法外杀戮还为时过早。
在强奸谋杀案发生后的几天里,数千人到海得拉巴警察局外面抗议,坚决要求处死凶手。
前宝莱坞明星、现为印度议会上院议员的贾亚·巴赫昌甚至表示,被告应该被私刑处决。
她在印度议会辩论这起轮奸案事件时表示,她知道这听起来很苛刻,但这类人就是应该公开处死。
其他几位来自各政治派别的议员也谴责了这起残忍的轮奸谋杀行为。
在印度其他地方,还举行了不少支持这名受害者的抗议示威和守夜活动。根据印度法律,这名受害者姓名尚不能透露。
自从2012 年 12 月在首都德里发生一名女学生在一辆公共汽车上遭到轮奸和谋杀以来,针对妇女的强奸和性暴力一直是印度关注的焦点。
后来她给家人打电话说,她有一个轮胎爆胎,而有一个卡车司机主动提出帮忙。她说她在一个公路收费站附近等着。
此后,她的家人就没能再联系上她,随后报警,称其失踪。第二天早上,一个送牛奶工在天桥下发现她已经被烧焦的遗体。
警方调查后称,这位27岁受害者在被杀前遭到轮奸。
印度强奸问题频发,近年来社会民情对这一事件愤怒不已。事件曝光后,其家人指责警方行动缓慢。特别是有警察甚至暗示受害者当时是否私奔了。
之后,警方将3名接到失踪报告的警察解职,并逮捕了四名嫌疑人。
此案让民众就强奸频发问题的愤怒情绪爆发,几天内,大规模抗议导致群体事件,警方受到巨大的批评和压力。很多民众要求,不能让这些罪犯借助司法逃避罪责,应该严惩甚至对其立即处以极刑。
四名嫌疑人被警方拘留后,于当地时间周五(12月6日)凌晨被带回犯罪现场重现指认案发情况。这是海得拉巴市郊区的一个名为赛博阿巴德(意为网络之地)的新兴区域,这里有着许多全球大科技公司驻地,比如微软和谷歌。
印度警方告诉BBC泰卢固语部说,嫌犯试图偷取警察的枪逃跑,被警察击毙。在这个过程中,两名警察也受伤了。
击毙嫌疑人的消息传出后,受害者的母亲告诉BBC说,虽然女儿再不能失而复得,但原来以为无法得到的正义已经得到伸张。希望其他女孩不会再有自己女儿的悲惨遭遇。
这位母亲还说,她希望印度能加强关于性侵犯和强奸的法律。
受害人的妹妹说,警方的行动非常出乎意料。她原来也期待法庭审判和法庭伸张正义,虽然这不能让她姐姐死而复生,但这是一个很大的安慰。
她说,由于警方的行动,潜在的罪犯将会三思而后行,可能不敢再做这样的事情。
民众庆祝
BBC泰卢固语部在当地的记者得到嫌疑人被击毙的消息后,去受害者家里采访,看到受害者的邻居们用鞭炮庆祝,数千人走上街头为警察欢呼,有人在街上发糖。
然而,一位执法专家批评了警方的行动,但同时补充说,现在说警方杀人是否构成法外处决还为时过早。
在印度的社交媒体上,警方行动的消息广为流传。许多人在推特和脸书上为警察点赞鼓掌,称赞他们替天行道,伸张正义。
2012 年,在首都德里,一名学生曾在公交车上遭到轮奸折磨后死亡,其母亲也对这起枪杀嫌疑犯事件表示赞许。
她告诉印度媒体表示,她对这种惩罚非常满意。警方做得非常好。
BBC泰卢固语部记者巴拉在枪杀现场报道说,大约有2千民众在那里聚集,造成巨大的交通堵塞。
车辆在高速公路上已经无法行使,现场人们高声喊着警察万岁。
在事件现场,人们还将玫瑰花瓣和糖果撒向在场的警察。
普拉卡什·辛格是一名退休警官,也是警察制度改革的主要设计师。他告诉BBC,枪决嫌疑人事件完全可以避免。
他表示,在押人员被带往法庭或犯罪现场时,应谨慎行事。在将其提取出监狱之前,应保护他们,戴上手铐,并妥善搜查。
如果警察不小心,什么样的事情都可能发生。
但辛格也表示,现在说这起事件是否属于法外杀戮还为时过早。
在强奸谋杀案发生后的几天里,数千人到海得拉巴警察局外面抗议,坚决要求处死凶手。
前宝莱坞明星、现为印度议会上院议员的贾亚·巴赫昌甚至表示,被告应该被私刑处决。
她在印度议会辩论这起轮奸案事件时表示,她知道这听起来很苛刻,但这类人就是应该公开处死。
其他几位来自各政治派别的议员也谴责了这起残忍的轮奸谋杀行为。
在印度其他地方,还举行了不少支持这名受害者的抗议示威和守夜活动。根据印度法律,这名受害者姓名尚不能透露。
自从2012 年 12 月在首都德里发生一名女学生在一辆公共汽车上遭到轮奸和谋杀以来,针对妇女的强奸和性暴力一直是印度关注的焦点。
Monday, December 2, 2019
डीएमके की नैया पार करेंगे प्रशांत किशोर :प्रेस रिव्यू
तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए डीएमके की रणनीति बनाने की ज़िम्मेदारी प्रशांत किशोर संभालेंगे. इससे पहले बीजेपी, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर चुके प्रशांत किशोर जल्दी ही पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन से मुलाक़ात करने वाले हैं.
द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार पार्टी के राजनीतिक रणनीतिकार सुनील ने पार्टी नेतृत्व से वैचारिक मतभेद के बाद अपने काम से इस्तीफ़ा दे दिया है जिसके बाद पार्टी को अब प्रशांत किशोर से उम्मीद है.
पार्टी के एक सूत्र के हवाले से अख़बार लिखता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के पलानीसामी को चुनौती देने के लिए प्रशांत किशोर ख़ास रणनीति तैयार करेंगे.
"मैं अभी भी हिंदुत्व की विचारधारा के साथ हूं और कभी भी इस विचारधारा को छोड़ नहीं सकता हूं."
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विधानसभा में यह बयान दिया. इस ख़बर को द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित किया है. इसके अलावा उन्होंने बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज़ कसते हुए कहा "वादा निभाना भी मेरे लिए हिंदुत्व का ही हिस्सा है. मैं अपने हिंदुत्व का ही पालन करता रहा हूं, कर रहा हूं और आगे भी करूंगा."
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की 88वीं जनरल मीटिंग में फ़ैसला लिया गया है कि बोर्ड लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों में बदलाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख़ करेगा.
बीसीसीआई में पदाधिकारियों के कार्यकाल को सीमित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक सुधारों में ढिलाई देने के लिए बोर्ड में सहमति बन गई है और इसके लिए प्रस्तावित संशोधनों को कोर्ट की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा.
इसी साल 23 अक्टूबर को सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे और उन्हें दस महीनों में ये पद छोड़ना था. लेकिन माना जा रहा है कि अगर बोर्ड के प्रस्ताव को कोर्ट की मंज़ूरी मिल जाती है तो गांगुली 2024 तक बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर बने रह सकते हैं.
वहीं, अख़बार में छपी एक और ख़बर के अनुसार बोर्ड की बैठक के बाद अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्वकप में महेंद्र सिंह धोनी शामिल होंगे या नहीं ये वही बताएंगे. बीसीसीआई के नए प्रमुख सौरव गांगुली ने ये कहा है.
इस साल जुलाई में इंग्लैंड में खेले गए एक दिवसीय विश्व कप में भी धोनी ने शिरकत नहीं की थी. न तो वो वेस्ट इंडीज़ दौरे का ही हिस्सा थे और न ही भारत में दक्षिण अफ़्रीका और बांग्लादेश के साथ खेली गई सीरिज़ का. गांगुली ने कहा कि धोनी ने खुद कहा है कि अपने सन्यास के बारे में वो अगले साल की जनवरी से पहले कुछ नहीं कहेंगे.
द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार पार्टी के राजनीतिक रणनीतिकार सुनील ने पार्टी नेतृत्व से वैचारिक मतभेद के बाद अपने काम से इस्तीफ़ा दे दिया है जिसके बाद पार्टी को अब प्रशांत किशोर से उम्मीद है.
पार्टी के एक सूत्र के हवाले से अख़बार लिखता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के पलानीसामी को चुनौती देने के लिए प्रशांत किशोर ख़ास रणनीति तैयार करेंगे.
"मैं अभी भी हिंदुत्व की विचारधारा के साथ हूं और कभी भी इस विचारधारा को छोड़ नहीं सकता हूं."
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विधानसभा में यह बयान दिया. इस ख़बर को द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित किया है. इसके अलावा उन्होंने बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज़ कसते हुए कहा "वादा निभाना भी मेरे लिए हिंदुत्व का ही हिस्सा है. मैं अपने हिंदुत्व का ही पालन करता रहा हूं, कर रहा हूं और आगे भी करूंगा."
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की 88वीं जनरल मीटिंग में फ़ैसला लिया गया है कि बोर्ड लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों में बदलाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख़ करेगा.
बीसीसीआई में पदाधिकारियों के कार्यकाल को सीमित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक सुधारों में ढिलाई देने के लिए बोर्ड में सहमति बन गई है और इसके लिए प्रस्तावित संशोधनों को कोर्ट की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा.
इसी साल 23 अक्टूबर को सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे और उन्हें दस महीनों में ये पद छोड़ना था. लेकिन माना जा रहा है कि अगर बोर्ड के प्रस्ताव को कोर्ट की मंज़ूरी मिल जाती है तो गांगुली 2024 तक बोर्ड के अध्यक्ष के पद पर बने रह सकते हैं.
वहीं, अख़बार में छपी एक और ख़बर के अनुसार बोर्ड की बैठक के बाद अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्वकप में महेंद्र सिंह धोनी शामिल होंगे या नहीं ये वही बताएंगे. बीसीसीआई के नए प्रमुख सौरव गांगुली ने ये कहा है.
इस साल जुलाई में इंग्लैंड में खेले गए एक दिवसीय विश्व कप में भी धोनी ने शिरकत नहीं की थी. न तो वो वेस्ट इंडीज़ दौरे का ही हिस्सा थे और न ही भारत में दक्षिण अफ़्रीका और बांग्लादेश के साथ खेली गई सीरिज़ का. गांगुली ने कहा कि धोनी ने खुद कहा है कि अपने सन्यास के बारे में वो अगले साल की जनवरी से पहले कुछ नहीं कहेंगे.
Wednesday, November 20, 2019
هل ينبغي السماح للعمال والموظفين بـ"النوم في أماكن العمل"؟
تقول الحكومة الأمريكية إن النوم في مقرّ العمل ممنوع مطلقا. لكن خبراء يقولون إن الوقت قد حان لإعادة النظر.
وقررت الحكومة الأمريكية اتخاذ إجراءات صارمة في مواجهة نوم القيلولة في وقت العمل.
ولطالما كان نوم الموظفين الفيدراليين في العمل مثار استياء، لكنه لم يكن محظورا بشكل صريح قبل الآن.
وأصدرت إدارة الخدمات العامة الأمريكية في وقت سابق من الشهر الجاري قرارا إداريا جاء فيه: "يُحظر على الجميع النوم في المنشآت الفيدرالية، ما لم يكن هناك ترخيص بذلك من مسؤول في المنشأة المعنية".
ساحة النوم والراحة والسياسة: 13 معلومة من تاريخ السرير
ولم يتضح بعد سبب صدور القرار الإداري الرسمي، لكنها ليست المرة الأولى التي تتخذ فيها الحكومة إجراءً ضد نوم العمال في مقارّ أعمالهم.
وفي عام 2018، أصدر مكتب مراجع الحسابات في كاليفورنيا تقريرا عن إحدى العاملات في إدارة المركبات المتحركة في الولاية الأمريكية، والتي كانت تنام ثلاث ساعات في اليوم أثناء الدوام. وقدّر التقرير تكلفة نوم هذه العاملة على الدولة بنحو 40 ألف دولار في أربعة أعوام.
وقال التقرير إن نوم هذه الموظفة كان يترك زملاءها مضطرين إلى العمل مكانها والقيام بمهامها المتروكة.
ولم تتلقَّ الموظفة تحذيرا، لأن المشرف عليها كان قلقا من إمكانية أن تكون هنالك مشكلة صحية وراء هذا النعاس.
ويتخوّف البعض من اتجاه العمال بشكل جمعي إلى تعويض ما فاتهم من نوم في منازلهم في العمل. ويستهدف النقاش حول النوم في أماكن العمل زيادة الإنتاجية وليس تقليصها.
ويقول لورنس إبستين، الرئيس السابق للأكاديمية الأمريكية لطب النوم، إن أكثر من 70 مليون أمريكي يعانون من اضطرابات تتعلق بالنوم.
وصدرت عن جامعة بول ستيت في ولاية إنديانا الأمريكية دراسة حديثة لنحو 150 ألف شخص، وأظهرت أن نسبة الذين ينامون سبع ساعات أو أقل كل ليلة ارتفعت إلى 35.6 في المئة عام 2018 مقارنة بـ 30.9 في المئة عام 2010.
وقال نصف من شملتهم الدراسة، وكانوا رجال شرطة وعُمّال رعاية صحية، إنهم لا ينالون قسطا كافيا من النوم.
وقال إبستين لبي بي سي: "بعض الشركات باتت أكثر وعيا في هذا الخصوص، ومن ثم شرعت في تمهيد السُبل لطرح القضية للنقاش. ولا أظن مؤسساتنا الحكومية الأمريكية رائدة في هذه الطريق".
وأضاف: "إنه موضوع يمكن وينبغي مناقشته، لكن ذلك لا يحدث للأسف".
إن كل نقص في القسط اللازم من النوم يمكن أن يؤثر سلبا على صحة الأشخاص واقتصادهم.
ويرتبط نقص النوم بجملة من المشكلات الصحية، بينها السِمنة والسُكّري وأمراض القلب، فضلا عن مشكلات تتعلق بالصحة النفسية كالقلق والاكتئاب.
وتقول مؤسسة "راند" في تحليل أجرته عام 2016 إن عدم حصول العمال على كفايتهم من النوم يُكبّد الاقتصاد الأمريكي خسائر تقدر بـ 411 مليار دولار سنويا.
ويدعم عدد من الخبراء، بينهم إبستين، السماح للعمال بالحصول على فترة نوم قصيرة أثناء الدوام.
يقول إبستين إن "الأشخاص المحرومين من النوم لا يعملون بكل طاقتهم ويكونون عُرضة أكثر من غيرهم للحوادث في مكان العمل، وهو ما يعود على الشركات بمزيد من التكاليف نظرا لما يصاب به هؤلاء من مشكلات صحية".
وثمة دول لا تتخذ نفس النظرة السلبية تجاه النوم في مقرّ العمل؛ ففي اليابان على سبيل المثال، تتخذ الشركات حجرات ذات حواجز عازلة للصوت لتشجيع العمال، الذين يعملون لساعات طويلة، على الحصول على قسط من الراحة.
وقررت الحكومة الأمريكية اتخاذ إجراءات صارمة في مواجهة نوم القيلولة في وقت العمل.
ولطالما كان نوم الموظفين الفيدراليين في العمل مثار استياء، لكنه لم يكن محظورا بشكل صريح قبل الآن.
وأصدرت إدارة الخدمات العامة الأمريكية في وقت سابق من الشهر الجاري قرارا إداريا جاء فيه: "يُحظر على الجميع النوم في المنشآت الفيدرالية، ما لم يكن هناك ترخيص بذلك من مسؤول في المنشأة المعنية".
ساحة النوم والراحة والسياسة: 13 معلومة من تاريخ السرير
ولم يتضح بعد سبب صدور القرار الإداري الرسمي، لكنها ليست المرة الأولى التي تتخذ فيها الحكومة إجراءً ضد نوم العمال في مقارّ أعمالهم.
وفي عام 2018، أصدر مكتب مراجع الحسابات في كاليفورنيا تقريرا عن إحدى العاملات في إدارة المركبات المتحركة في الولاية الأمريكية، والتي كانت تنام ثلاث ساعات في اليوم أثناء الدوام. وقدّر التقرير تكلفة نوم هذه العاملة على الدولة بنحو 40 ألف دولار في أربعة أعوام.
وقال التقرير إن نوم هذه الموظفة كان يترك زملاءها مضطرين إلى العمل مكانها والقيام بمهامها المتروكة.
ولم تتلقَّ الموظفة تحذيرا، لأن المشرف عليها كان قلقا من إمكانية أن تكون هنالك مشكلة صحية وراء هذا النعاس.
ويتخوّف البعض من اتجاه العمال بشكل جمعي إلى تعويض ما فاتهم من نوم في منازلهم في العمل. ويستهدف النقاش حول النوم في أماكن العمل زيادة الإنتاجية وليس تقليصها.
ويقول لورنس إبستين، الرئيس السابق للأكاديمية الأمريكية لطب النوم، إن أكثر من 70 مليون أمريكي يعانون من اضطرابات تتعلق بالنوم.
وصدرت عن جامعة بول ستيت في ولاية إنديانا الأمريكية دراسة حديثة لنحو 150 ألف شخص، وأظهرت أن نسبة الذين ينامون سبع ساعات أو أقل كل ليلة ارتفعت إلى 35.6 في المئة عام 2018 مقارنة بـ 30.9 في المئة عام 2010.
وقال نصف من شملتهم الدراسة، وكانوا رجال شرطة وعُمّال رعاية صحية، إنهم لا ينالون قسطا كافيا من النوم.
وقال إبستين لبي بي سي: "بعض الشركات باتت أكثر وعيا في هذا الخصوص، ومن ثم شرعت في تمهيد السُبل لطرح القضية للنقاش. ولا أظن مؤسساتنا الحكومية الأمريكية رائدة في هذه الطريق".
وأضاف: "إنه موضوع يمكن وينبغي مناقشته، لكن ذلك لا يحدث للأسف".
إن كل نقص في القسط اللازم من النوم يمكن أن يؤثر سلبا على صحة الأشخاص واقتصادهم.
ويرتبط نقص النوم بجملة من المشكلات الصحية، بينها السِمنة والسُكّري وأمراض القلب، فضلا عن مشكلات تتعلق بالصحة النفسية كالقلق والاكتئاب.
وتقول مؤسسة "راند" في تحليل أجرته عام 2016 إن عدم حصول العمال على كفايتهم من النوم يُكبّد الاقتصاد الأمريكي خسائر تقدر بـ 411 مليار دولار سنويا.
ويدعم عدد من الخبراء، بينهم إبستين، السماح للعمال بالحصول على فترة نوم قصيرة أثناء الدوام.
يقول إبستين إن "الأشخاص المحرومين من النوم لا يعملون بكل طاقتهم ويكونون عُرضة أكثر من غيرهم للحوادث في مكان العمل، وهو ما يعود على الشركات بمزيد من التكاليف نظرا لما يصاب به هؤلاء من مشكلات صحية".
وثمة دول لا تتخذ نفس النظرة السلبية تجاه النوم في مقرّ العمل؛ ففي اليابان على سبيل المثال، تتخذ الشركات حجرات ذات حواجز عازلة للصوت لتشجيع العمال، الذين يعملون لساعات طويلة، على الحصول على قسط من الراحة.
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